₹25 से ₹73 तक: 1.3 लाख से ज़्यादा रेट से जानें अपना पशु चारा सस्ता कैसे बनाएं

₹25 से ₹73 तक: 1.3 लाख से ज़्यादा रेट से जानें अपना पशु चारा सस्ता कैसे बनाएं

Farming • September 27, 2026

👤 By: Farming Expert Team
📅 Sep 27, 2026
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🇮🇳 India 🌐 ਪੰਜਾਬੀ 📚 Sourced
📌 Quick Summary

अगर आप भी अपने गाय, भैंस या पोल्ट्री के लिए चारा बनाकर खर्च कम करना चाहते हैं, तो यह गाइड आपके लिए है। हमने 1 लाख 34 हजार से ज़्यादा मंडी रिकॉर्ड्स का विश्लेषण करके बताया कि गेहूं, मक्का, सोयाबीन और मसाला में से प्रति रुपया कौन सबसे बेहतर मान लेता है।

आज भारत में पशु पालन करने वाला हर किसान एक ही बात की चिंता में रहता है — चारे की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, और मुनाफा कम होता जा रहा है। चाहे आप डेयरी का काम कर रहे हों, मुर्गी पालन हो, बकरी-भेड़ हो या सूअर — एक ही सच है: अगर चारे का खर्च ठीक से नियंत्रित न हो, तो पूरे मुनाफे पर असर पड़ जाता है। लेकिन किसान भाई को अक्सर ये पता भी नहीं चलता कि आज बाजार में कौन सा सामान सस्ता है और कौन सा महंगा, क्योंकि कोई एक जगह पर सारा जवाब देने वाला सोर्स ही नहीं था। हमारे पास अगमार्कनेट के 1,34,742 रिकॉर्ड के अंदर के कमोडिटी प्राइस डेटा का विश्लेषण किया है — ये भारत के सबसे बड़े कृषि मार्केटिंग डेटाबेस का है, और इसमें गेहूं, मक्का, सोयाबीन, सरसों और चना सहित कई फीड इंग्रीडिएंट्स के रेट शामिल हैं। आज के आर्टिकल में हम बात करेंगे कि इन रेट के आधार पर आप अपना पशु चारा कैसे बनाकर सस्ता कर सकते हैं।

चारा सामग्री के रेट पहले से ही समझ लें

आज बाजार में प्रॉपर चारा बनाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उनके औसत रेट इस तरह हैं:
  • मक्का (लोकल) — औसत ₹23 प्रति किलो, रेंज ₹12 से ₹48 तक
  • गेहूं — औसत ₹25–26 प्रति किलो (विभिन्न ग्रेड पर), रेंज ₹16 से ₹48 तक
  • सोयाबीन — औसत ₹56 प्रति किलो, रेंज ₹15 से ₹110 तक
  • चना (साबुत) — औसत ₹60 प्रति किलो, रेंज ₹26 से ₹98 तक
  • सरसों — औसत ₹73 प्रति किलो, रेंग ₹50 से ₹87 तक
ये रेट अगमार्कनेट के सभी 1 लाख से ज़्यादा रिकॉर्ड्स का औसत हैं, इसलिए इन पर भरोसा किया जा सकता है। अगर आप किसी मंडी में सामान खरीदने जाते हैं, तो ये फिगर आपके लिए एक अच्छा रेफरेंस पॉइंट हैं।
ILRI, Stevie Mann - Loading sweet sorghum stover into truck for use as bio-fuel and livestock feed in Andhra Pradesh, In
ILRI, Stevie Mann - Loading sweet sorghum stover into truck for use as bio-fuel and livestock feed in Andhra Pradesh, India by Photo: ILRI/Stevie Mann (CC BY 2.0) · source

प्रोटीन के लिए कौन सा सस्ता है?

पशुओं के चारे में प्रोटीन सबसे ज़रूरी हिस्सा होता है, क्योंकि यह दूध, अंडा और मांस बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन प्रोटीन युक्त सामग्री आमतौर पर महंगी ही होती है।
सोयाबीन — प्रोटीन का सबसे बेहतर विकल्प
सोयाबीन औसत ₹56 प्रति किलो आता है — ये सूचीबद्ध सभी प्रोटीन सामग्री में सबसे सस्ता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है और इसे सीधे चारे में मिलाया जा सकता है या सोयाबीन केक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ध्यान रहे — इसका रेंज ₹15 से ₹110 तक है, यानी कभी-कभी ये बहुत महंगा भी चला जाता है। इसलिए बाजार के रेट देखकर ही खरीदारी करें।
चना और सरसonium — महंगे विकल्प
चना औसत ₹60 प्रति किलो और सरसों ₹73 प्रति किलो आता है — दोनों ही सोयाबीन से महंगे हैं। फिर भी कुछ किसान इन्हें चारे में मिलाते हैं, खासकर जब सोयाबीन का रेट बढ़ जाता है। कुछ किसान चना का उपयोग करते हैं, दूसरे सरसों केक को प्राथमिकता देते हैं — यह आपकी लोकल उपलब्धता और बचत पर निर्भर करता है।

एनर्जी के लिए सबसे सस्ता सामान

पशुओं को प्रोटीन के साथ-साथ एनर्जी भी चाहिए होता है — यह पेट भरने और वजन बढ़ाने के लिए ज़रूरी है। एनर्जी सोर्स के रूप में ये विकल्प आपके सामने हैं:
  • मक्का — ₹23 प्रति किलो, ये सबसे सस्ता एनर्जी सोर्स है। मक्का पशुओं के चारे का मुख्य हिस्सा होता है, खासकर गाय-भैंस के लिए।
  • गेहूं — ₹25–26 प्रति किलो, अपनी ग्रेड के आधार पर। कुछ किसान फाएवरेज क्वालिटी गेहूं इस्तेमाल करते हैं, कुछ मिल क्वालिटी का — अपने बजट के अनुसार चुनें।
  • आलू — ₹14 प्रति किलो, यह भी एक किफायती एनर्जी सोर्स है और कई ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को दिया जाता है।

बड़ी रेंज का मतलब आपके लिए क्या है?

अब ये तो देखा कि औसत रेट क्या है, लेकिन इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि किसी भी कमोडिटी के रेट में बहुत फरक होता है। सोयाबीन का रेंज ₹15 से ₹110 तक है — यानी एक मंडी में ₹15 में मिल रहा है, दूसरी जगह ये ₹110 तक चला गया है। मक्का ₹12 से ₹48 तक, गेहूं ₹16 से ₹48 तक और सरसों ₹50 से ₹87 तक है। यह फरक क्या करता है? सोयाबीन के उदाहरण पर आओं — अगर आपने ₹15 प्रति किलो में सोयाबीन खरीदा और आपके पड़ोसी ने ₹110 में, तो वह ₹95 प्रति किलो का फर्क है। किलो-किलो में ये थोड़ा लगता है, लेकिन बैल या गाय के लिए महीने में 50–100 किलो चारा चाहिए होता है — ये गणना कर लें कि महीने में कितना सस्ता हो सकता है। इस फरक के मुख्य कारण हैं — मौसम, मंडी से मंडी तक, आपूर्ति की स्थिति और मंडी में buyers की संख्या। इसलिए हमेशा अपने नज़दीकी दो-तीन मंडियों के रेट चेक करें, खासकर महीने के शुरू और अंत में।

पुराने और नए पशु पालन तरीके

भारत में पशु पालन का इतिहास बहुत पुराना है — और उस वक्त का तरीका बिल्कुल अलग था। पहले किसान अपने पशुओं को खेत में घास चरा लेते थे, जीवन के लिए जरूरी चीजें खोजते थे। पशु से दूध, अंडा, ऊन, खाल और कुछ जगह पर रक्त लिया जाता था। मांस इस वक्त एक ऐतिहासिक आधार पर भी दूसरी प्राथमिकता थी। गाय-भैंस को खेत में काम लगाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था, और उनकी गोबर खेत की उपज बढ़ाने के लिए मदद करती थी — ये पूरी तरह से एक मिश्रित कृषि-पशु प्रणाली थी। आज के समय में बात अलग है — अधिकांश पशु पालन इंटेंसिव हो गया है। डेयरी फार्म में गायों को जीरो-ग्रेजिंग सिस्टम में रखा जाता है, जहां उन्हें बाहर से ही चारा दिया जाता है। बीफ फैटलॉट में भैंसों को उच्च घनत्व में रखकर पोषित किया जाता है। सूअर क्लाइमेट कंट्रोल की इमारतों में रखे जाते हैं। मुर्गी पालन भी पूरी तरह से मैनेज किया जाता है। ये सिस्टम ज्यादा मुनाफा देते हैं लेकिन चारे की पूरी जिम्मेदारी किसान की होती है — बाहर से ही सब कुछ खरीदना पड़ता है।
EPIC Feed- Fish Feed - A Product of West Bengal Livestock Development Corporation Limited 2020-09-20
EPIC Feed- Fish Feed - A Product of West Bengal Livestock Development Corporation Limited 2020-09-20 by খাঁ শুভেন্দু (CC BY-SA 4.0) · source

बाजार की किफायती सोच से चारा बनाएं

आपकी चारे की बैंक बुड्जेट तीन भागों में बांटी जा सकती है:
  1. सस्ता एनर्जी सोर्स — मक्का (₹23/किलो) और गेहूं (₹25–26/किलो) इसे पूरा करते हैं। ये सबसे ज़्यादा मात्रा में चारे का हिस्सा होना चाहिए।
  2. प्रोटीन सप्लीमेंट — सोयाबीन (₹56/किलो) सबसे किफायती विकल्प है। उसे चारे का कम से कम 10–20% हिस्सा बनाना है, अपनी पशु की जरूरत के अनुसार।
  3. अतिरिक्त सामग्री — कुछ किसान चना या सरसों केक का भी मिश्रण बनाते हैं, यह आपके बजट और उपलब्धता पर निर्भर करता है।
हर किसान की स्थिति अलग-अलग होती है। आपके इलाके में कौन सा सामान आसानी से मिलता है, उसका रेट क्या है, और आपके पशु किस उम्र के हैं — ये सब गणना करके ही आपको अपना वो फॉर्मूलेशन बनाना है। जिस तरह गेहूं में FAQ क्वालिटी और मिल क्वालिटी के फर्क हैं, वैसे ही अन्य सामान में भी ग्रेड के आधार पर रेट भिन्न होता है।

बोझ डालने की बजाय अपना बजट बनाएं

चारा खरीदने से पहले ये गणना कर लें: आपके पशु के लिए प्रोटीन की कितनी जरूरत है और एनर्जी की कितनी? अगर आपके पास गाय है जो दूध दे रही है, तो उसे प्रोटीन की ज्यादा जरूरत होती है — इसलिए चारे में सोयाबीन जैसी सामग्री का हिस्सा ज़्यादा रखें। अगर बेईंह दुग्ध गाय है या भैंस है जो दूध दे रही है, तो थोड़ी कम प्रोटीन वाला चारा भी काम करेगा। मक्का और गेहूं सस्ते होने के कारण इन्हें आपका मुख्य चारा बना सकता है, लेकिन इनमें प्रोटीन की मात्रा कम होती है। इसलिए इन्हें थोड़ी सी प्रोटीन वाली सामग्री के साथ मिलाकर ही दें। हर जगह वीटरनेरी या पशु चिकित्सक का सलाह लें कि आपके पशु के लिए सही मिश्रण क्या है।

रेंज का फायदा उठाएं

ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਜ਼ਮੀਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇ, ਉੱਥੇ ਆਪਣੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਸਵੇਰੇ ਜਾਂ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਥੋੜੀ ਦੇਰ ਚਾਰੇ 'ਤੇ ਭਿਗੋ ਦਿਓ। ਇਸ ਤੋਂ ਤੁਹਾਡੀ ਹਰੀ ਚਾਰਾ ਖਰੀਦ ਦਾ ਖਰਚ ਘੱਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਹੀ ਫੀਟ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਗ੍ਰਾਮ ਪੰਚਾਇਤ ਦੀ ਜ਼ਮੀਂ ਜਾਂ ਸड़ਕ ਦੇ ਕਿਨਾਰੇ ਦੇ ਖਾਲੀ ਇਲਾਕੇ 'ਤੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਚਰਾ ਸਕਦੇ ਹੋ — ਪਹਿਲਾਂ ਸਥਾਨੀਕ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਇਜਾਜ਼ਤ ਲੈ ਲੈਣਾ ਭਲਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ।

ਬੰਧੂਆਂ ਨਾਲ ਮਿਲ ਕੇ ਬਲਕ ਖਰੀਦੋ

ਗਾਵ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਬੰਧੂਆਂ ਨਾਲ ਮਿਲ ਕੇ ਚਾਰਾ ਖਰੀਦਣਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਤਰੀਕਾ ਹੈ। ਦੁਕਾਨਦਾਰ ਤੇ ਰੇਟ ਘੱਟ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਟਰਾਂਸਪੋਰਟ ਦਾ ਖਰਚ ਵੀ ਬਾਂਟ ਸਕਦੇ ਹੋ। ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਰ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਘੱਟ ਖਰਚ 'ਚ ਚਾਰਾ ਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
Livestock feed trailers at Lumsdaine
Livestock feed trailers at Lumsdaine by Graham Robson (CC BY-SA 2.0) · source

ਘਰ ਦੇ ਕੂੜੇ ਨਾਲ ਖਾਦ ਬਣਾਓ

ਘਰ ਦਾ ਬਾਚਾ ਕੂੜਾ, ਗੋਬਰ ਅਤੇ ਖੇਤ ਦੇ ਅਵਸ਼ੇਸ਼ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕੰਪੋਸਟ ਪਿੱਟ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ। ਇਹ ਕੰਪੋਸਟ ਤੁਹਾਡੇ ਖੇਤ ਵੀ ਚੰਗਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਚਾਰੇ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣ 'ਤੇ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਸਿਹਤ ਚੰਗੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ।

ਸੱਚੀ ਸਲਾਹ

ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਥੋੜੀ ਜਿਹੀ ਮਿਹਨਤ ਵਿੱਚ ਸਵੈ-ਭਰੋਸਾ ਚਾਰਾ ਉਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਖਰਚ ਆਪਣੇ ਆਪ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਘਰ ਦੇ ਪਿਛੋਕੜ ਜਾਂ ਖਾਲੀ ਟੈਂਕ ਵਿੱਚ ਹਰੀ ਚਾਰਾ (ਜੈ. ਓਟ, ਵੀੱਟ, ਜੋਵਾਰ) ਦਾ ਬੀਜ ਬੀਉਂ ਅਤੇ 7-10 ਦਿਨ 'ਚ ਘੁਲ ਕੇ ਉੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਸਿਲੇਜ ਵਾਂਗ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਚਾਰੇ ਦੀ ਘਟਨ ਮੁਜ਼ੱਬ ਨਹੀਂ ਰਹਿੰਦੀ। ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਡੀ ਪਲੇਟ ਦੀ ਮੰਗ ਹਮੇਸ਼ਾ ਪੂਰੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬਾਜਾਰ ਦੇ ਰੇਟ 'ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਨਹੀਂ ਰਹਿੰਦਾ।

ਖੇਤ ਦੇ ਰਹੀਤ ਵੀ ਚਾਰਾ ਹਨ

ਗੇਹੂੰ, ਚਾਵਲ ਜਾਂ ਮਕ्कੀ ਦੀ ਕਟਾਈ ਦੇ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦੀਆਂ ਡੰਗਲਾਂ, ਪੱਤਿਆਂ ਅਤੇ ਡੰਗਲਾਂ ਨੂੰ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਚਰਾ ਸਕਦੇ ਹੋ। ਕਈ ਕਿਸਾਨ ਇਹਨੂੰ ਚਰਾਉਣ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦੇ ਹਨ, ਜਦੋਂ ਕਿ ਇਹ ਚੀਜ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਮਿਲਦੇ ਹਨ। ਸਾਵਧਾਨੀ ਇਹ ਰੱਖੋ ਕਿ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਦੀ ਮਿਟੀ ਵਾਲੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਧੋ ਕੇ ਦਿਓ ਤਾਂ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਪੇਟ ਟੁੱਟ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦੀ।

ਬੋਜ਼ ਚਾਰਾ ਖ਼ਰਚ ਨੂੰ 50% ਤੱਕ ਘਟਾਓ

ਪਸ਼ੂ ਚਾਰੇ 'ਚ ਵਿਟਾਮਿਨ, ਮਿਨਰਲ ਅਤੇ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਗੈਰਹਿਸਤੀ ਨਾ ਕਰੋ। ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪੋਸ਼ਕ ਚਾਰਾ ਦੀ ਖਰੀਦ ਕਰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਸੋਚ ਕੇ ਖਰੀਦੋ ਕਿ ਇਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦਾ ਪੱਧਰ ਕਿੰਨਾ ਹੈ। ਘਰ ਦੇ ਖਾਦੇ (ਜੈ. ਚੁਕੀ ਦਾ ਚੀਨ, ਸੋਇਆ ਖੰਡ, ਕੱਲ੍ਹਾ) ਨੂੰ ਵੀ ਚਾਰੇ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ — ਪਰ ਇਹ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਾ ਮਿਲਾਓ।

ਫਾਈਨਲ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਲਾਹ

ਚਾਰੇ ਦਾ ਖਰਚ ਘਟਾਉਣ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਤRIC ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੀ ਚਾਰੇ ਦੀ ਮੰਗ ਦਾ ਹਿਸਾਬ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਰੱਖੋ। ਮੰਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀ ਖਰੀਦੋ, ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਾ ਖਰੀਦੋ ਤਾਂ ਜੋ ਨਸ਼ੀਆ ਨਾ ਲੱਗ ਜਾਵੇਂ। ਹਰ 2-3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਮਾਰਕੀਟ ਦੇ ਰੇਟ ਦਾ ਹਿਸਾਬ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜਿੱਥੇ ਸਸਤਾ ਮਿਲੇ ਉੱਥੇ ਭਰੀ-ਭਰਾਕੇ ਖਰੀਦੋ। ਅਗਲੇ ਸਾਲ ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕਿ ਤੁਹਾਡਾ ਚਾਰਾ ਖਰਚ 30 ਤੋਂ 50% ਤੱਕ ਘੱਟ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂ ਵੀ ਤੰਦਰੁਸਤ ਰਹੇ ਹਨ। ਆਓ ਅੱਜ ਤੋਂ ਸmart ਫਾਰਮਿੰਗ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ!

❓ Frequently asked questions

प्रति रुपया सबसे ज़्यादा प्रोटीन कौन सी कमोडिटी देती है?

Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक, सोयाबीन औसत ₹56 प्रति किलो है, बंगल ग्राम ₹60 प्रति किलो, और मसाला ₹73 प्रति किलो। मक्का ₹23 और गेहूं ₹25-26 प्रति किलो है — ये ज़्यादा प्रोटीन नहीं देते लेकिन कम कीमत में मिलते हैं। चारा में प्रोटीन की औसत मात्रा के बारे में कोई आंकड़ा नहीं है, इसलिए अपने पास के डीलर या पशु डॉक्टर से रेशम बैलेंस करके ही सही मिश्रण बनाएं।

चारे की सबसे सस्ती एनर्जी सोर्स कौन सी है?

मक्का (लोकल) औसत ₹23 प्रति किलो है, गेहूं ₹25-26 प्रति किलो (हर ग्रेड में), और आलू ₹14 प्रति किलो — ये मुख्य रूप से एनर्जी देने वाली कमोडिटियां हैं। अलग से लकड़ी ₹5 प्रति किलो है, लेकिन यह चारा नहीं है — यह खाना पकाने का सोर्स है। हर पशु की एनर्जी की जरूरत अलग-अलग होती है, इसलिए सटीक मिश्रण बनाने के लिए कृषि अधिकारी या पशु चिकित्सक से सलाह लें।

भारत के अलग-अलग मंडियों में चारे की कीमत में कितना फरक होता है?

Agmarknet के 1 लाख 34 हज़ार से ज़्यादा रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि कीमत में काफी फेर-बदल होता है। सोयाबीन ₹15 से ₹110 प्रति किलो, मक्का ₹12 से ₹48 प्रति किलो, गेहूं ₹16 से ₹48 प्रति किलो, और मसाला ₹50 से ₹87 प्रति किलो तक देखी गई है। यह फरक मौसम, क्षेत्र और मंडी के आधार पर होता है, इसलिए अपने नज़दीकी मंडी में कौन सी दुकान सबसे सस्ती दे रही है, यह पहले ही चेक कर लें।

लिवस्टॉक में कौन से जानवर आते हैं?

लिवस्टॉक का मतलब है उन सभी पाले जानवरों का जिनसे व्यावसायिक फायदा हो — गाय, भैंस, बकरी, ऊंट, सुअर, पोल्ट्री, घोड़ा और अन्य पाले हुए जानवर। इनसे दूध, अंडा, उन, चमड़ा, लोम और काम मिलता है। पुराने समय में जानवरों का इस्तेमाल खेत में काम और खाद बनाने में भी होता था — मांस के लिए काटना सबसे पीछे का काम था।

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Published sources

  1. Livestock en.wikipedia.org

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