पशु टीकाकरण शेड्यूल: गाय-भैंस को बीमारी से बचाएं

Farming • August 23, 2026

👤 By: Shariq Daudi
📅 Aug 23, 2026
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📌 Quick Summary
  • Learn proven techniques and best practices
  • Understand common mistakes to avoid
  • Get practical tips you can use immediately

नमस्ते किसान भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए — सुबह-सुबह आप गोठ में जाते हैं और आपकी सबसे बढ़िया दूध देने वाली भैंस चारा नहीं खा रही, मुंह से लार टपक रही है और दूध आधा रह गया है। दिल एकदम बैठ जाता है ना? एक बीमार पशु आपकी कई महीनों की कमाई पल भर में चौपट कर सकता है। और सबसे दुख की बात ये है कि ज़्यादातर बड़ी बीमारियों से बचना बहुत आसान और सस्ता है — बस सही समय पर टीका (वैक्सीन) लगवाना पड़ता है।

इस पूरे आर्टिकल में हम बिलकुल आसान भाषा में समझेंगे कि आपके गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सुअर को कौन-कौन से टीके, किस उम्र में और साल में कितनी बार लगते हैं। साथ में ये भी बताएंगे कि सरकार कौन-से टीके बिलकुल फ्री में लगा रही है। तो चाय का कप उठाइए और आराम से पढ़िए — ये जानकारी आपके पशुओं की जान और आपकी जेब, दोनों बचाएगी।

बीमारी से बचाव इतना ज़रूरी क्यों है?

देखिए, इलाज हमेशा बचाव से महंगा पड़ता है। जब पशु बीमार पड़ता है तो सिर्फ दवाई का खर्चा नहीं होता — दूध गिर जाता है, पशु कमज़ोर हो जाता है, बैल काम नहीं कर पाता और कई बार तो गाभिन पशु का बच्चा भी गिर जाता है। ये सब मिलाकर हज़ारों रुपये का नुकसान हो जाता है।

वहीं दूसरी तरफ, अगर आप एक ठीक-ठाक टीकाकरण शेड्यूल फॉलो करें तो पशुओं में बीमारी का खतरा 70% तक कम हो जाता है। मतलब थोड़ी सी समझदारी और सही समय पर लगाया गया एक टीका आपको बड़े नुकसान से बचा लेता है। इसीलिए समझदार किसान दवाई से ज़्यादा बचाव (prevention) पर ध्यान देते हैं। अच्छा टीकाकरण, अच्छी खुराक और नए पशु को अलग रखना — ये तीन काम इलाज के मुकाबले कहीं ज़्यादा मुनाफा देते हैं।

  • दूध का प्रोडक्शन बना रहता है — स्वस्थ पशु पूरा दूध देता है, आपकी महीने की डेयरी इनकम सुरक्षित रहती है।
  • दवाई और डॉक्टर का खर्चा बचता है — बार-बार इलाज नहीं कराना पड़ता।
  • पशु की जान बचती है — कई बीमारियां जानलेवा होती हैं।
  • बछड़े-बछिया सुरक्षित रहते हैं — गर्भपात का खतरा कम होता है।

कौन-कौन सी बीमारियां आपके पशुओं की दुश्मन हैं?

टीका लगवाने से पहले ये जान लेना ज़रूरी है कि आखिर हम किन बीमारियों से लड़ रहे हैं। भारत का मौसम — गर्मी, उमस और बरसात — इन बीमारियों के फैलने के लिए एकदम सही है। आइए मुख्य बीमारियों को एक-एक करके समझते हैं।

मुंहपका-खुरपका बीमारी (FMD)

इसे मुंह-खुर की बीमारी भी कहते हैं। ये बहुत तेज़ी से फैलने वाली वायरस बीमारी है जो गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सुअर — सबको पकड़ती है। इसमें पशु के मुंह और खुर में छाले पड़ जाते हैं, लार टपकती है, पशु खाना छोड़ देता है और दूध बुरी तरह गिर जाता है। बैल काम करने लायक नहीं रहते और पशु बांझ भी हो सकता है। इस बीमारी की वजह से दूध और मांस के बड़े बाज़ार (export) पर भी रोक लग जाती है। यही वजह है कि सरकार इसे सबसे बड़ा 'चुपचाप कमाई खा जाने वाला' दुश्मन मानती है।

गलघोंटू (HS)

ये बीमारी खासकर बरसात के मौसम में कहर बरपाती है। इसमें पशु के गले में सूजन आ जाती है, सांस लेने में तकलीफ होती है और कई बार पशु बहुत जल्दी मर जाता है। इसीलिए इसका टीका बरसात आने से पहले लगवाना बहुत ज़रूरी है।

लंगड़ी बुखार (BQ)

इसे एकटंगा या लंगड़ा बुखार भी कहते हैं। इसमें पशु की जांघ की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, पशु लंगड़ाने लगता है और तेज़ बुखार होता है। ये उन इलाकों में ज़्यादा होती है जहां पहले से ये बीमारी रही हो।

ब्रुसेलोसिस (Brucellosis)

ये बहुत खतरनाक बीमारी है क्योंकि ये पशु से इंसान में भी फैल सकती है (यानी zoonotic है)। इसकी वजह से गाभिन गाय-भैंस का बच्चा समय से पहले गिर जाता है और पशु दोबारा गाभिन होने में दिक्कत करता है। सीधे-सीधे ये आपके भविष्य की कमाई पर चोट है। दूध निकालने वाले और पशु के साथ काम करने वालों को भी इसका संक्रमण हो सकता है, इसलिए इससे बचाव इंसान की सेहत के लिए भी ज़रूरी है।

बकरी-भेड़ का प्लेग (PPR)

इसे 'बकरी प्लेग' भी कहते हैं। ये बकरी और भेड़ों में बहुत तेज़ी से फैलती है और झुंड के झुंड साफ कर देती है। सरकार इस बीमारी को 2030 तक जड़ से खत्म करने के मिशन पर काम कर रही है, इसलिए बकरी-भेड़ पालने वालों के लिए इसका टीका सबसे ज़रूरी है।

सुअर का बुखार (CSF)

सुअर पालने वालों के लिए ये सबसे बड़ी बीमारी है। अच्छी बात ये है कि टीके से इसे रोका जा सकता है और सरकार पूरे सुअर समुदाय को वैक्सीन देने का लक्ष्य रखे हुए है।

इनके अलावा एंथ्रैक्स और रेबीज़ जैसी बीमारियां भी होती हैं जो पशु से इंसान में जा सकती हैं। इनके टीके भी सरकारी योजना में राज्यों की ज़रूरत के हिसाब से शामिल किए जाते हैं।

गाय, भैंस, बकरी और सुअर का पूरा टीकाकरण शेड्यूल

अब आते हैं सबसे काम की बात पर — कौन सा टीका कब लगवाना है। नीचे दिया गया शेड्यूल पूरे भारत में आमतौर पर फॉलो किया जाता है। बस एक बात हमेशा याद रखें — कोई भी टीका लगवाने से पहले अपने नज़दीकी पशु डॉक्टर से एक बार ज़रूर सलाह लें, क्योंकि हर इलाके की बीमारी और मौसम अलग होता है।

गाय और भैंस के लिए
  • FMD (मुंहपका-खुरपका): बछड़े-बछिया को पहला टीका 4 महीने की उम्र में। इसके बाद हर 6 महीने में एक बार (यानी साल में दो बार) दोहराते रहें।
  • गलघोंटू (HS): साल में एक बार, बरसात शुरू होने से पहले।
  • लंगड़ी बुखार (BQ): 6 महीने की उम्र पर, खासकर उन इलाकों में जहां ये बीमारी पहले से रही हो।
  • ब्रुसेलोसिस: सिर्फ बछिया (मादा बच्चे) को, 4 से 8 महीने की उम्र के बीच — ज़िंदगी में सिर्फ एक बार।
बकरी और भेड़ के लिए
  • PPR (बकरी प्लेग): बकरी-भेड़ के लिए ये सबसे ज़रूरी टीका है। सरकार 2030 तक इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करना चाहती है, इसलिए डॉक्टर से पूछकर अपनी सभी बकरी-भेड़ों को ये टीका ज़रूर लगवाएं।
  • FMD: बकरी-भेड़ को भी मुंहपका-खुरपका होता है, इसलिए इनका FMD टीका भी ज़रूरी है।
  • गलघोंटू/लंगड़ी: जहां ज़रूरत हो, डॉक्टर की सलाह पर बरसात से पहले लगवा लें।
सुअर के लिए
  • CSF (सुअर बुखार): सुअर पालने वालों के लिए ये सबसे ज़रूरी टीका है। डॉक्टर की सलाह से पूरे झुंड को लगवाएं।
  • FMD: सुअर को भी मुंहपका-खुरपका होता है, इसलिए ये टीका भी लगवाना चाहिए।

छोटी सी सलाह: एक कॉपी या मोबाइल में हर पशु का रिकॉर्ड लिखकर रखें — किस पशु को कौन सा टीका कब लगा और अगला कब लगना है। इससे कोई भी टीका छूटेगा नहीं।

सरकार का मुफ्त टीका — NADCP और LHDCP योजना

अब सबसे अच्छी खबर! सरकार आपके पशुओं के लिए कई बड़ी बीमारियों के टीके बिलकुल फ्री में लगा रही है। इसका मतलब है आपकी जेब से एक रुपया भी नहीं जाएगा। आइए समझते हैं ये योजनाएं कैसे काम करती हैं।

NADCP — मुफ्त FMD और ब्रुसेलोसिस टीका

NADCP यानी National Animal Disease Control Programme को हमारे प्रधानमंत्री जी ने सितंबर 2019 में शुरू किया था। इसका मकसद है FMD (मुंहपका-खुरपका) और ब्रुसेलोसिस — इन दो बड़ी बीमारियों को जड़ से खत्म करना। खास बात ये है कि इसका पूरा खर्चा (करीब 13,343 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार उठा रही है, यानी राज्य सरकार या किसान पर एक पैसे का बोझ नहीं है।

इस योजना के तहत आपको मिलता है:

  • सभी गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सुअर को FMD का मुफ्त टीका
  • सभी मादा बछिया (4 से 8 महीने) को ब्रुसेलोसिस का मुफ्त टीका — ज़िंदगी में एक बार।
  • हर पशु के कान में टैग (ear tag) लगाया जाता है और उसका पूरा हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से (INAPH सिस्टम में) रखा जाता है।

कई राज्यों में घर-घर जाकर टीका लगाने के कैंप लगते हैं। जैसे ही आपके गांव में सरकारी टीकाकरण अभियान आए, तुरंत अपने सभी पशुओं को लगवा लें — ये मौका छोड़ना सीधा घाटे का सौदा है।

LHDCP — बड़ी छत्रछाया वाली योजना

LHDCP (Livestock Health and Disease Control Program) एक बड़ी योजना है जिसके अंदर कई छोटी योजनाएं आती हैं। इसे पशुपालन विभाग (DAHD) चलाता है। इसका मकसद है टीकाकरण, बीमारी की निगरानी और पशु अस्पतालों को मज़बूत करना। इसमें ये सब शामिल है:

  • FMD और ब्रुसेलोसिस को 2030 तक खत्म करना (NADCP के ज़रिए)।
  • PPR (बकरी प्लेग) को 2030 तक और सुअर बुखार (CSF) को टीके से काबू करना।
  • एंथ्रैक्स और रेबीज़ जैसी बीमारियों के टीके भी राज्यों की ज़रूरत के हिसाब से।
1962 — घर बैठे पशु डॉक्टर बुलाइए

ये नंबर याद कर लीजिए — 1962। ये टोल-फ्री नंबर है। इस पर कॉल करके आप Mobile Veterinary Unit (चलता-फिरता पशु अस्पताल) अपने घर या खेत पर बुला सकते हैं। पशु डॉक्टर आपके दरवाज़े तक आकर इलाज और सलाह देते हैं। दूर-दराज़ के गांवों के किसानों के लिए ये बहुत बड़ी सुविधा है।

पशु औषधि — सस्ती दवाई

पशु औषधि योजना के तहत सस्ती जेनेरिक दवाइयां और देसी (ethno-veterinary) दवाइयां PM-किसान समृद्धि केंद्र (PM-KSK) और सहकारी समितियों (cooperative society) पर मिलती हैं। तो अगली बार दवाई खरीदते समय इन जगहों का रेट ज़रूर पूछ लें — इससे आपके अच्छे-खासे पैसे बचेंगे।

टीका लगवाते समय इन बातों का ध्यान रखें

टीका तभी असर करता है जब उसे सही तरीके से रखा और लगाया जाए। कुछ छोटी-छोटी गलतियां पूरी मेहनत बेकार कर सकती हैं। इन बातों का ध्यान रखिए:

  • कोल्ड चेन (ठंडक) ज़रूरी है: वैक्सीन को हमेशा सही ठंडे तापमान पर रखना पड़ता है। गर्मी में रखी हुई वैक्सीन बेकार हो जाती है और कोई फायदा नहीं करती।
  • सिर्फ स्वस्थ पशु को ही टीका लगवाएं: अगर पशु पहले से बीमार, बहुत कमज़ोर या ज़्यादा गाभिन है तो डॉक्टर से पूछकर ही टीका लगवाएं।
  • सही समय चुनें: गलघोंटू और लंगड़ी जैसे टीके बरसात से पहले लगवा लें। बीमारी फैलने का इंतज़ार मत करिए — पहले से तैयार रहिए।
  • डॉक्टर की सलाह लें: खुद से या सुनी-सुनाई बात पर टीका मत लगाइए। हर पशु और इलाके के हिसाब से डॉक्टर सही सलाह देगा।
  • रिकॉर्ड रखें: मोबाइल या कॉपी में तारीख लिखकर रखें ताकि अगली डोज़ न छूटे।
  • भरोसेमंद जगह से ही वैक्सीन लें: सस्ते के चक्कर में नकली या खराब वैक्सीन मत खरीदिए।

सिर्फ टीका काफी नहीं — ये काम भी करें

टीकाकरण बचाव की सबसे मज़बूत दीवार है, लेकिन अकेला टीका सब कुछ नहीं कर सकता। कुछ और आसान काम मिलाकर आप अपने फार्म को बीमारियों से लगभग सुरक्षित बना सकते हैं।

नया पशु लाएं तो अलग रखें (Quarantine)

जब भी बाज़ार या किसी दूसरी जगह से नया पशु खरीदकर लाएं, उसे कम से कम 2-3 हफ्ते बाकी पशुओं से अलग रखें। अगर उसमें कोई छुपी हुई बीमारी होगी तो वो आपके बाकी झुंड में नहीं फैलेगी।

गोठ की सफाई और साफ पानी
  • पशु के रहने की जगह साफ और सूखी रखें।
  • गोबर-मूत्र रोज़ हटाएं ताकि कीड़े-मच्छर न पनपें।
  • पीने का पानी हमेशा साफ और ताज़ा हो।
अच्छा चारा और खुराक

जिस पशु को भरपेट और पोषक चारा मिलता है, उसकी रोग-प्रतिरोधक ताकत (immunity) मज़बूत रहती है। डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर विटामिन और मिनरल मिक्सचर भी देते रहें। मज़बूत पशु बीमारी से जल्दी नहीं हारता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

गाय-भैंस के लिए सबसे ज़रूरी टीका कौन सा है?

FMD यानी मुंहपका-खुरपका का टीका सबसे ज़रूरी माना जाता है। इसे हर 6 महीने में लगवाना चाहिए। अच्छी बात ये है कि ये सरकारी NADCP योजना में मुफ्त में भी लगता है।

बछड़े-बछिया को पहला टीका किस उम्र में लगता है?

आमतौर पर बछड़े-बछिया को FMD का पहला टीका 4 महीने की उम्र में और लंगड़ी बुखार (BQ) का टीका 6 महीने की उम्र में लगता है। मादा बछिया को ब्रुसेलोसिस का टीका 4 से 8 महीने के बीच एक बार लगता है।

क्या टीका खुद लगा सकते हैं?

नहीं, बेहतर है कि टीका हमेशा पशु डॉक्टर की देखरेख में ही लगवाएं। गलत तरीके या खराब वैक्सीन से नुकसान हो सकता है। ज़रूरत हो तो 1962 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके डॉक्टर को घर बुला सकते हैं।

सरकारी मुफ्त टीका कैसे लगवाएं?

अपने गांव के पशु अस्पताल या पशु डॉक्टर से संपर्क करें, या 1962 पर कॉल करें। जब आपके इलाके में NADCP का टीकाकरण अभियान चले, तब सभी पशुओं को एक साथ लगवा लें।

आखिरी बात

देखिए भाई, पशुपालन में असली कमाई तभी है जब पशु स्वस्थ रहे। एक भी बड़ी बीमारी आपके सालभर के मुनाफे को मिट्टी में मिला सकती है। और सबसे बढ़िया बात ये है कि इससे बचना आपके अपने हाथ में है — बस सही समय पर टीका, थोड़ी सफाई और अच्छा चारा। सरकार तो बड़े-बड़े टीके फ्री में लगा ही रही है, बस आपको आगे बढ़कर इस मौके का फायदा उठाना है।

आज ही अपने पशुओं का एक टीकाकरण रिकॉर्ड बनाइए, नज़दीकी पशु डॉक्टर से बात कीजिए और अगले सरकारी टीका कैंप का पता कीजिए। याद रखिए — इलाज से हमेशा बचाव सस्ता और अच्छा होता है। आपके पशु स्वस्थ, तो आपका घर खुशहाल!

💡 Tip: Keep simple records and monitor your animals regularly. Consistent tracking helps you spot problems early and get better results over time.
⚠️ Important: If you notice any health issues, consult a veterinarian immediately. Prevention is always better than treatment.

📚 Where the figures in this guide come from

We read what has already been published on the subject, take out the figures and rules it actually states, and write it up in plain, everyday language. Every number and name here traces back to a source listed below — nothing in this guide is invented.

Published sources

  1. Livestock Health and Disease Control Program (LHDCP) – DAHD dahd.gov.in
  2. Livestock Health and Disease Control - DAHD dahd.gov.in
  3. Livestock Health and Disease Control Scheme 2026 Guidelines PDF sarkariyojana.com
  4. NADCP Scheme 2026 - Free FMD Vaccination & Dairy Benefit agrijob.in
  5. Vaccination Schedule for Cattle in India: Complete Guide petvethealthcare.in
  6. Livestock vaccination schedule — FMD, HS, Brucellosis (PashuMate) pashumate.com

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