मूंग का भूसा
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मूंग का भूसा
गर्मी आते ही भेड़ और बकरियों के बीमार होने की तादाद तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में छोटे किसानों और पशुपालकों की परेशानी में भी काफी इजाफा हो जाता है। इसे देखते हुए आइवीआरआइ वैज्ञानिकों ने भेड़ और बकरियों के स्वास्थ्य के लिए दलहन खासकर मूंग की दाल को काफी बेहतर बताया है। पाया कि लगातार मूंग की दाल के भूसे को चारे के रूप में खाने वाली भेड़-बकरी धान और गेहूं का भूसा खाने वाले पशुओं की तुलना में ज्यादा सेहतमंद हैं।

मूंग का भूसा खिलाने के फायदे
- गेहूं और धान के मुकाबले दाल के भूसे में प्रोटीन, विटामिन प्रचुर मात्रा में होता है।
- यह भेड़ व बकरी में तेजी से शारीरिक बढ़ोतरी में मददगार होता है।
- इसके अलावा जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी तेजी से बढ़ जाती है।
- दुग्ध उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है। और दाल का भूसा हर हाल में सूखा होना चाहिए। और उसमें भी नमी न आए।

मई-जून के लिए है मूंग की खेती
गेहूं की फसल कटने के बाद जिले के अधिकांश किसानों के खेत दो महीने खाली रहते हैं। जिले में फिलहाल मूंग की फसल नहीं बोई जाती है। जबकि स्थानीय परिस्थितियों के लिए मूंग की खेती मुफीद है। ऐसे में गेहूं की फसल के फौरन बाद मूंग की दाल बोई जा सकती है।
किसानों और पशु पालकों को मूंग की दाल की खेती करने के लिए जागरूक किया जाएगा। इससे किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे। वहीं भेड़-बकरियों को भी उत्तम पोषाहार मिल पाएगा।

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